लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (पित्ताशय निकालने की सर्जरी)
पित्त की पथरी का ऑपरेशन हमारे यहाँ सबसे आम सर्जरी में से एक है और ज्यादातर मरीज अगली सुबह घर चले जाते हैं। जानिए ऑपरेशन में असल में होता क्या है और पहला महीना कैसा गुजरता है।
चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. मुरलीधर बोब, MS, FAIS, DLS, FMAS — लेप्रोस्कोपिक सर्जन एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट
यह क्या है
लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी यानी तीन या चार छोटे छेदों के जरिए, दूरबीन और बारीक औजारों की मदद से पित्ताशय निकालना — बड़ा चीरा लगाए बिना। आज पूरी दुनिया में लक्षण देने वाली पित्त की पथरी का यही मानक इलाज है।
पित्ताशय दाहिनी ओर लिवर के नीचे छिपी एक छोटी, नाशपाती जैसी थैली है। इसका एकमात्र काम है पित्त को जमा करना और चिकनाई वाला खाना आने पर उसे निचोड़कर बाहर भेजना। जब इसके भीतर पथरी बन जाती है तो वह इस रास्ते को रोक देती है — और बंद रास्ते पर थैली का जोर लगाना ही वह क्लासिक दर्द पैदा करता है: दाहिनी पसलियों के नीचे कसकर पकड़ने वाला तेज दर्द, अक्सर रात के खाने के बाद, कभी पीठ या दाहिने कंधे तक जाता हुआ।
एक बात कई मरीजों को चौंकाती है: हम पूरा पित्ताशय निकालते हैं, सिर्फ पथरी नहीं। यह जानबूझकर किया जाता है। जिस पित्ताशय ने एक बार पथरी बनाई है, वह दोबारा भी बनाएगा — इसलिए केवल पथरी निकालने का मतलब है आगे चलकर दूसरे ऑपरेशन की गारंटी।
किसे इसकी जरूरत होती है
पित्त की पथरी बेहद आम है। ऑपरेशन उन्हीं के लिए है जो परेशानी पैदा कर रही हों।
- बार-बार पड़ने वाले दर्द के दौरे — पेट के ऊपरी हिस्से का वह तेज दर्द, उल्टी के साथ या बिना, जो लोगों को रात में इमरजेंसी तक ले आता है।
- एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस, जिसमें पित्ताशय में सूजन और संक्रमण हो जाता है, बुखार आता है और दर्द रुक-रुककर नहीं, लगातार रहता है।
- पित्त नली में खिसक गई पथरी, जिससे पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस हो गया हो। ऐसे में पहले नली साफ की जाती है, आमतौर पर ERCP से, और उसके बाद पित्ताशय निकाला जाता है।
- पथरी से हुआ पैंक्रियाटाइटिस — दौरा शांत होने के बाद पित्ताशय निकालना जरूरी है, वरना यह दोबारा होगा।
- सोनोग्राफी में मोटी दीवार वाला, सिकुड़ा हुआ या काम न करने वाला पित्ताशय।
- पित्ताशय के पॉलिप, जो करीब एक सेंटीमीटर से बड़े हों या जाँच में बढ़ते दिख रहे हों।
- कुछ खास हालात में बिना लक्षण वाली पथरी — लंबे समय से डायबिटीज, कैल्शियम जमा हुआ (पोर्सिलेन) पित्ताशय, या बहुत बड़ी पथरी।
“थोड़ा रुककर देख क्यों न लें? दर्द तो हर बार अपने आप शांत हो जाता है।” शांत हो ही जाता है, और यही बात पित्त की पथरी को धोखेबाज बनाती है। हर दौरा पित्ताशय के आसपास थोड़ा और चिपकाव छोड़ जाता है, और हर बार अगला ऑपरेशन थोड़ा और मुश्किल तथा थोड़ा और जोखिम भरा हो जाता है। इससे भी बड़ी बात — जो पथरी आज दो घंटे का दर्द दे रही है, वह कल पित्त नली में खिसककर पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस कर सकती है, और वह एक नियोजित दूरबीन ऑपरेशन से कहीं बड़ी बीमारी है। इंतज़ार की कीमत होती है; बस उसका बिल तुरंत नहीं आता।
ऑपरेशन कैसे किया जाता है
आप जनरल एनेस्थीसिया में पूरी तरह बेहोश रहते हैं।
नाभि के पास एक छोटा छेद बनाया जाता है और पेट को कार्बन डाइऑक्साइड गैस से हल्के से फुलाकर काम करने की जगह बनाई जाती है। दूरबीन उसी रास्ते से भीतर जाती है, और दाहिने ऊपरी पेट में दो-तीन और पतले पोर्ट लगाए जाते हैं।
लिवर का किनारा उठाकर पित्ताशय को पकड़ा और ऊपर की ओर खींचा जाता है, ताकि उसकी गर्दन के पास का तिकोना हिस्सा साफ दिखने लगे। यही अगला कदम पूरे ऑपरेशन का दिल है। गर्दन के आसपास के ऊतक को तब तक सावधानी से अलग किया जाता है जब तक दो रचनाएँ — सिस्टिक डक्ट और सिस्टिक धमनी — बिना किसी शक के साफ न दिख जाएँ। सर्जन इसे “क्रिटिकल व्यू ऑफ सेफ्टी” कहते हैं, और यही अनुशासन मुख्य पित्त नली की रक्षा करता है। जब तक यह दृश्य साफ न हो, कुछ भी काटा या क्लिप नहीं किया जाता।
इसके बाद सिस्टिक धमनी और डक्ट पर क्लिप लगाकर उन्हें काटा जाता है, और पित्ताशय को लिवर की सतह से धीरे-धीरे अलग कर लिया जाता है। लिवर पर बचे छोटे रक्तस्राव बिंदु सील कर दिए जाते हैं। पित्ताशय को, पथरी समेत, एक थैली में रखकर नाभि वाले पोर्ट से बाहर निकाल लिया जाता है।
जहाँ पित्त नली में पथरी का शक हो, वहाँ ऑपरेशन के दौरान कोलेंजियोग्राम या अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है, या नली को सर्जरी से पहले या बाद में ERCP से अलग से साफ किया जाता है। नाली (ड्रेन) कभी-कभार ही लगाई जाती है — तब, जब चीरफाड़ मुश्किल रही हो या पित्ताशय में बहुत सूजन रही हो। अंत में गैस निकालकर पोर्ट के छेद बंद कर दिए जाते हैं, आमतौर पर त्वचा के नीचे घुल जाने वाले टाँकों से, इसलिए बाद में टाँके निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।
एनेस्थीसिया, अवधि और अस्पताल में भर्ती
हर मामले में जनरल एनेस्थीसिया।
सीधे-सादे पित्ताशय में ऑपरेशन 30 से 60 मिनट लेता है। सूजे हुए या बार-बार दौरे झेल चुके पित्ताशय में, जहाँ परतें आपस में चिपकी हों, 60 से 90 मिनट या कभी-कभी उससे ज्यादा लग सकते हैं — और वह अतिरिक्त समय समस्या नहीं, सही जगह लगाया गया समय है।
ज्यादातर मरीज सर्जरी वाली सुबह भर्ती होते हैं और अगली सुबह घर चले जाते हैं, यानी आमतौर पर एक रात का ठहराव। एक्यूट कोलेसिस्टाइटिस, बुजुर्ग मरीज, या जिन्हें ERCP भी करवाना पड़ा हो, उन्हें दो से चार दिन रुकना पड़ता है। होश आने के कुछ घंटों बाद आप घूँट-घूँट पानी लेने लगेंगे, उसी शाम हल्का खाना खाएँगे और खुद चलकर बाथरूम तक जाएँगे।
रिकवरी
पहला दिन। पोर्ट वाली जगहों पर, खासकर नाभि पर, हल्का दर्द। कई मरीजों को दाहिने कंधे में अजीब-सा दर्द महसूस होता है — यह गैस की वजह से होने वाला रेफर्ड दर्द है, दिल या फेफड़े की समस्या नहीं, और एक-दो दिन में चला जाता है। लेटे रहने से ज्यादा चलने-फिरने से यह जल्दी हटता है। हल्का खाना, दर्द की गोलियाँ, और सुबह तक घर।
पहला हफ्ता। दर्द से ज्यादा शिकायत थकान की होती है। दो-तीन दिन पट्टियाँ सूखी रखें, फिर सामान्य रूप से नहा सकते हैं। मन का खाइए, पर हल्का और कम तेल वाला। कुछ दिन शौच थोड़ा पतला या थोड़ा सुस्त रह सकता है। ज्यादातर लोग चौथे दिन तक दर्द की दवा बंद कर देते हैं।
दूसरे से चौथे हफ्ते। ऑफिस का काम, गाड़ी चलाना और घर की सामान्य दिनचर्या लौट आती है। चलना अच्छा है और इसकी सलाह दी जाती है। भारी वजन उठाने और पेट की कसरत से बचें। इसी दौरान खानपान भी चुपचाप सामान्य हो जाता है।
छह हफ्ते तक। जिम, साइकिल, खेत और कारखाने का काम — सब कुछ। निशान तीन-चार छोटे चिह्नों में बदल जाते हैं, जिन्हें ज्यादातर लोग साल भर के भीतर देखना ही बंद कर देते हैं।
करीब एक हफ्ते में आपकी जाँच होगी, और दोबारा तब जब पित्ताशय की हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आ जाएगी।
दूरबीन से क्यों, खुले ऑपरेशन से क्यों नहीं
खुले ऑपरेशन का मतलब था दाहिनी पसलियों के नीचे 15 सेंटीमीटर का चीरा, पाँच से सात दिन अस्पताल, और छह हफ्ते काम से छुट्टी। आप में से कई को अपने पिता या चाचा का वैसा ही ऑपरेशन याद होगा।
दूरबीन सर्जरी उसी अंग को ऐसे छेदों से निकाल देती है जिन्हें उंगली की नोक से ढका जा सकता है। पेट की मांसपेशियों की दीवार काटी ही नहीं जाती — और पुराने ऑपरेशन की लगभग हर मुश्किल उसी दीवार से जुड़ी थी: दर्द, गहरी साँस न ले पाने से छाती की परेशानियाँ, घाव का संक्रमण, और सालों बाद हर्निया। खून बहुत कम बहता है। भर्ती लगभग एक हफ्ते से घटकर एक रात रह जाती है। लोग डेढ़ महीने के बजाय सात-दस दिन में काम पर लौट आते हैं।
एक बात ईमानदारी से कहनी जरूरी है। थोड़े से मामलों में — गहरी सूजन, सालों के दौरों से बने मोटे चिपकाव, अस्पष्ट रचना, या न रुकने वाला रक्तस्राव — सबसे सुरक्षित कदम यही होता है कि सर्जन खुले ऑपरेशन में बदल जाए। यह फैसला आपकी पित्त नली की सुरक्षा के लिए लिया जाता है, और जो सर्जन जरूरत पड़ने पर यह फैसला लेने से हिचकिचाए, वह गलत सर्जन है।
जोखिम और जटिलताएँ
पित्ताशय की सर्जरी सुरक्षित और नियमित है, लेकिन कोई भी ऑपरेशन जोखिम-मुक्त नहीं होता, और आपको यह सूची साफ-साफ जान लेनी चाहिए।
- पित्त नली में चोट — सबसे गंभीर जटिलता, और ऊपर बताई गई बारीक सावधानी की वजह भी यही है। यह असामान्य है, पर असंभव नहीं।
- पित्त का रिसाव, सिस्टिक डक्ट के सिरे से या लिवर की सतह से, जिसके लिए कभी-कभी ERCP या ड्रेन की जरूरत पड़ती है।
- रक्तस्राव, आमतौर पर सिस्टिक धमनी या लिवर की सतह से।
- पित्त नली में रह गई पथरी, जो बाद में पीलिया या दर्द के रूप में सामने आ सकती है और ERCP से निकाली जाती है।
- संक्रमण, पोर्ट वाली जगह पर या पेट के भीतर पानी जमा होने के रूप में।
- खुले ऑपरेशन में बदलाव, जैसा ऊपर बताया गया।
- आंत, आमाशय या रक्त वाहिकाओं में चोट पोर्ट डालते समय — दुर्लभ।
- पोर्ट वाली जगह पर हर्निया, ज्यादातर नाभि पर, और वजन ज्यादा होने पर इसकी आशंका बढ़ जाती है।
- ऑपरेशन के बाद पतले दस्त, जो आमतौर पर हल्के होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं।
- कुछ मरीजों में पेट के ऊपरी हिस्से का दर्द बना रहना, जहाँ असल में लक्षणों की वजह पथरी थी ही नहीं — यही कारण है कि हम ऑपरेशन की सलाह देने से पहले पूरी तरह जाँच करते हैं।
- एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिम, जिन पर एनेस्थेटिस्ट आपसे अलग से बात करेंगे।
विकल्प
देखो और इंतजार करो — यह उन ‘चुप’ पथरियों के लिए वाकई उचित है जो किसी और जाँच में संयोग से मिली हों, बशर्ते आपको खतरे के संकेत पता हों।
खानपान में बदलाव — तला और चिकनाई वाला खाना घटाने से कुछ लोगों में दौरों की संख्या कम होती है। इससे पथरी न गलती है, न ही यह पथरी के नली में खिसकने को रोकता है।
दवा से पथरी गलाना (ursodeoxycholic acid) सिर्फ छोटी, बिना कैल्शियम वाली कोलेस्ट्रॉल पथरी पर और तभी काम करता है जब पित्ताशय काम कर रहा हो; इसमें कई महीने लगते हैं और दवा बंद करने पर पथरी दोबारा बनने की दर ऊँची है। आज इसकी भूमिका सीमित है।
अकेला ERCP पित्त नली से पथरी निकाल देता है, पर पित्ताशय को छोड़ देता है — जबकि पथरी बन वहीं रही है। यह इलाज का एक कदम है, इलाज का विकल्प नहीं।
खुला ऑपरेशन, ऊपर बताई गई परिस्थितियों में।
अगर आप अभी यह तय कर रहे हैं कि ऑपरेशन आपके लिए सही है या नहीं, तो क्या पित्त की पथरी में हमेशा ऑपरेशन जरूरी है वाला हमारा लेख इस सवाल पर विस्तार से बात करता है, और जनरल सर्जरी एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग का पेज बताता है कि हमारी सर्जिकल टीम और क्या-क्या काम संभालती है।
खर्च कितना आता है
शुभम हाई-टेक हॉस्पिटल में लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी: ₹44,000 – ₹72,000। यह सब कुछ मिलाकर बताया गया आंकड़ा है — सर्जन की फीस, ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया, सामान्य ठहराव का कमरा किराया, दवाइयाँ और नियमित जाँचें।
कृपया ध्यान दें: ऊपर दिए गए आंकड़े एक सामान्य मामले के लिए अनुमानित हैं। वास्तविक खर्च आपकी स्थिति, सर्जरी की जटिलता, आपके द्वारा चुने गए कमरे की श्रेणी, अस्पताल में रुकने की अवधि और किसी भी जटिलता पर निर्भर करता है। डीलक्स और सुपर डीलक्स कमरों का शुल्क अधिक होता है। आपातकालीन भर्ती तथा रात या अवकाश के दिन की सर्जरी पर अतिरिक्त शुल्क लगता है। ये शुल्क बिना पूर्व सूचना के बदल सकते हैं। कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने मामले के लिए लिखित अनुमान हेतु कृपया +91-8668954915 पर कॉल करें।
सर्जरी की तैयारी
- अपनी सोनोग्राफी रिपोर्ट और पुरानी सभी जाँचें साथ लाएँ, साथ ही पहले के दौरों या भर्ती के डिस्चार्ज पेपर भी।
- अपनी सारी दवाओं की सूची बनाएँ। एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल और वारफेरिन जैसी खून पतला करने वाली दवाओं की योजना पहले से बनानी पड़ती है — इन्हें अपने आप कभी बंद न करें।
- डायबिटीज, हृदय रोग, दमा, थायरॉइड और पेट की किसी भी पुरानी सर्जरी के बारे में हमें बताएँ।
- भर्ती से पहले आमतौर पर खून की जाँचें, लिवर फंक्शन टेस्ट, ECG और छाती का एक्स-रे कराने को कहा जाता है।
- सर्जरी से छह घंटे पहले कुछ भी खाना नहीं और दो घंटे पहले कुछ भी पीना नहीं, जब तक हम अलग से न कहें।
- सर्जरी की सुबह गहने, नेल पॉलिश और कॉन्टैक्ट लेंस उतार दें।
- रात के लिए एक परिजन और अगले दिन घर ले जाने वाले किसी व्यक्ति की व्यवस्था रखें।
- काम से करीब एक हफ्ता और भारी वजन उठाने से तीन-चार हफ्ते की छुट्टी रखें।
- अगर सर्जरी की तारीख से पहले बुखार, तेज दर्द या आँखों में पीलापन दिखे तो हमें फोन करें — अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।
पित्त की पथरी को शायद ही कभी इमरजेंसी बनने की जरूरत होती है, पर उस पर फैसला जरूर लेना पड़ता है। दौरा एक बार पड़ा हो या दस बार, अपनी रिपोर्ट लेकर शुभम हाई-टेक हॉस्पिटल, अमरावती की सर्जिकल टीम से मिलिए — हम ईमानदारी से बताएँगे कि आपको ऑपरेशन अभी चाहिए, बाद में चाहिए, या बिल्कुल नहीं। +91-8668954915 पर कॉल करें, यहाँ संपर्क करें, या हमारी सभी प्रक्रियाएँ देखें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। कृपया अपनी स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन के लिए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पित्ताशय के बिना जिंदगी सामान्य रहती है?
हाँ, बिल्कुल। पित्ताशय सिर्फ पित्त (bile) को जमा करता है, बनाता नहीं। लिवर पहले की तरह ही पित्त बनाता रहता है — फर्क सिर्फ इतना है कि अब वह चिकनाई वाले खाने के बाद एक साथ छूटने के बजाय लगातार थोड़ा-थोड़ा आंत में जाता रहता है। शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद अधिकांश लोगों को कोई फर्क महसूस ही नहीं होता।
क्या दवा से पथरी नहीं गल सकती?
कुछ दवाएँ खास तरह की कोलेस्ट्रॉल पथरी को गला सकती हैं, लेकिन वे सिर्फ छोटी पथरी पर और तभी काम करती हैं जब पित्ताशय ठीक से काम कर रहा हो। इसमें एक-दो साल लगते हैं और दवा बंद करते ही ज्यादातर लोगों में पथरी दोबारा बन जाती है। जिसे बार-बार दर्द का दौरा पड़ रहा हो, उसके लिए दवा शायद ही सही जवाब है। सच कहूँ तो मैंने ऑपरेशन से कहीं ज्यादा नुकसान इंतज़ार करने से होते देखा है।
क्या ऑपरेशन के बाद खानपान बदलना पड़ेगा?
सिर्फ थोड़े समय के लिए। पहले दो से चार हफ्ते ज्यादा तला और चिकनाई वाला खाना कम रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि पित्त के बहाव को नई लय में आने में थोड़ा वक्त लगता है। उसके बाद ज्यादातर लोग सामान्य खाना खाते हैं। कुछ लोगों को भारी, तैलीय खाने से कुछ महीनों तक पतले दस्त हो सकते हैं, जो अपने आप ठीक हो जाता है।
मेरी पथरी में कोई दर्द नहीं है। फिर भी ऑपरेशन कराना चाहिए?
आमतौर पर नहीं। जाँच में संयोग से मिली 'चुप' पथरी को देखते हुए छोड़ा जा सकता है, क्योंकि उनमें से ज्यादातर कभी परेशानी नहीं करतीं। कुछ अपवाद जरूर हैं — डायबिटीज, बहुत बड़ी पथरी, पित्ताशय की दीवार का मोटा या कैल्शियमयुक्त हो जाना, या पॉलिप — ऐसे में बिना लक्षण के भी हम निकालने की सलाह देते हैं। यह फैसला खुद लगाने का नियम नहीं, बल्कि सर्जन से बातचीत का विषय है।
कितने दिन में काम पर लौट सकते हैं?
ऑफिस का काम करीब एक हफ्ते में, अक्सर उससे भी पहले। गाड़ी तब चलाइए जब आप बिना दर्द के जोर से ब्रेक लगा सकें — आमतौर पर पाँच से सात दिन में। भारी वजन उठाना और जिम तीन से चार हफ्ते बाद। अगर आपके काम में बोरियाँ उठानी पड़ती हैं या घंटों बाइक चलानी पड़ती है, तो हमें बताइए — हम किताबी नहीं, व्यावहारिक तारीख देंगे।
क्या दूरबीन का ऑपरेशन बीच में खुले ऑपरेशन में बदल सकता है?
हाँ, बदल सकता है, और सहमति पत्र पर दस्तखत करने से पहले आपको यह पता होना चाहिए। यह थोड़े से मामलों में होता है — आमतौर पर तब जब बार-बार के दौरों से ऊतक बहुत ज्यादा सूजे या चिपके हों और रचना साफ न दिख रही हो। ऐसे में बदलना नाकामी नहीं, सुरक्षित फैसला है। इस जोखिम को घटाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि ऑपरेशन को सालों तक टाला न जाए।
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